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![]() कसता शिकंजा: लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण (बीच में) के लिए मुसीबत बनी श्रीलंकाई सेना.
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10 नवम्बर 2008
रॉयटर्स
कोलंबो। श्रीलंका सरकार ने तमिल विद्रोही संगठन लिट्टे के संघर्ष विराम का ताजा प्रस्ताव ठुकरा दिया है।
लिट्टे ने पिछले सप्ताह सरकार को यह प्रस्ताव भेजा था।
सरकार ने आज इसे सिरे से ठुकराते हुए कहा कि वह विद्रोहियों के हथियार डालने और आत्मसमर्पण के अलावा और किसी चीज के लिए तैयार नहीं होगी।
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कृषिमंत्री मैत्रिपाला सरिसेना ने इस सबंध में राष्ट्रपति मंहिदा राजपक्षे के रूख का समर्थन करते हुए आज संसद में बयान में कहा, “सरकार लिट्टे के साथ संघर्ष विराम के लिए कतई तैयार नहीं है। हम लिट्टे के साथ बातचीत के हक में भी नहीं हैं। हम उनसे हथियार डालकर आत्मसमर्पण के लिए कह चुके हैं हमारे इस रूख में कोई बदलाव नहीं होगा”।
सरिसेना पर लिट्टे ने 9 अक्टूबर को कोलंबो में जानलेवा हमला किया था और इस हमले में सरिसेना बाल-बाल बच निकले थे, जबकि एक व्यक्ति मारा गया था और पांच अन्य घायल हो गए थे।
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राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो ताजा सैनिक अभियान में लिट्टे लड़ाकों की हालत इतनी कमजोर हो चुकी है कि सरकार की ओर से संघर्ष विराम पर विचार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
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