15 जुलाई 2009
आवाज़ समाचारसरकार एनएचएआई की तर्ज पर ही ‘एक्सप्रेसवे प्राधिकरण’ बनाने पर विचार कर रही है। यह प्राधिकरण केवल एक्सप्रेसवे बनाने का ही काम करेगी। इसके लिए मंत्रालय राज्यों और निजी क्षेत्र के साथ बात करेगा।
इस वर्ष 12,000 किलोमीटर लम्बी सड़क बनेगी सड़क परिवहन मंत्री कमलनाथ के मुताबिक इसका प्रस्ताव तीन महीने में तैयार कर कैबिनेट को भेजा जाएगा। कमलनाथ के मुताबिक हाईवे और एक्सप्रेसवे अलग-अलग मॉडल पर आधारित होंगे।
एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण घनी आबादी वाली जगहों को जोड़ेगा। सीएनबीसी-आवाज़ के संपादक संजय पुगलिया से खास बातचीत में सड़क परिवहन मंत्री कमलनाथ ने कहा कि एक्सप्रेसवे दिल्ली-चंडीगढ़, दिल्ली-पुणे, दिल्ली-जयपुर जैसे घनी आबादी वाले मार्गों पर होंगे।
नई सड़कों के लिए ‘सेस’ की तैयारी साथ ही, इस खास बातचीत में आधार संरचना को सरकार की प्राथमिकता मानते हुए कमलनाथ ने कहा कि अलग नीतियों की वजह से मंत्रालय मंदी से बच पाई है। साथ ही, उन्होंने फिर दोहराया कि आधार संरचना में सरकार की प्राथमिकता सड़क बनाने पर होगी। इसके लिए मंत्रालय हर दिन 20 किलोमीटर सड़क बनाएगी यानि हर साल 60,000 किलोमीटर सड़क जोडी जाएगी।
कमलनाथ ने यह भी कहा कि बाकी जमीन अधिग्रहण के मुकाबले सड़क बनाने के लिए जमीन मिलना ज्यादा मुश्किल नहीं होना चाहिए क्योंकि हर कोई चाहता है सड़क उसके यहां तक पहुंचे, साथ ही उनके मुताबिक सड़क के लिए मुआवजे के नियम अलग हैं।
बिहार में बिछेगा सडकों का लम्बा जाल सड़क परिवहन मंत्री के मुताबिक जल्द ही ‘नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (एनएचएआई) का विकेन्द्रीयकरण किया जाएगा। इसके जरिए सरकार एनएचएआई की संरचना मजबूत करना चाहती है। साथ ही एनएचएआई का अपना कैडर होगा और इस दिशा में एनएचएआई में तेजी से नई भर्तियां होंगी।