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29 मई 2009
वार्ता
नई दिल्ली। भारतीय नौ सेना ने अदन की खाड़ी में एक और जांबाज ऑपरेशन में सोमाली समुद्री लुटरों के एक हमले को नाकाम करते हुए छह लुटेरों को आत्म समर्पण करने को मजबूर कर दिया जबकि दो लुटेरों के मारे जाने की आशंका हैं।
| नौसेना का सिरदर्द बने पकड़े गए जलदस्यु! |
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नौ सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों ने आज यहां बताया कि लुटेरों ने यह हमला अदन से करीब 225 समुद्री मील पूर्व में कल दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर किया जब भारतीय युद्धपोत आईएनएस तलवार तीन बड़े वाणिज्यिक पोतों को अपने पहरे में ले जा रहा था।
जंगी जहाज के पहरे में चल रहे एक पोत से एमवी मोड़ से राहत के लिए पुकार मिली जिसे कैप्टन सहित 10 भारतीय संचालित कर रहे थे। इसकी सूचना मिलते ही आईएनएस तलवार के कमांडिंग ऑफिसर ने हेलीकॉप्टर को रवाना किया क्योंकि लुटेरों की नौका एमवी मोड़ के दूसरी ओर थी। जब हेलीकॉप्टर पहुंचा तो उस समय लुटेरे जहाज पर सीढ़ी लगाकर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे। लुटेरों के प्रयास को नाकाम करने के लिए हेलीकॉप्टर से फायरिंग की गई। सूत्रों ने कहा कि फायरिंग के दौरान दो लुटेरों को पानी में गिरते देखा गया और वह सीढ़ी भी जहाज से छिटक गई जिससे होकर ये लुटेरे धावा बोल रहे थे।
भारतीय नौ सेना ने एक स्पीड बोट को लुटेरों की नौकाओं की ओर रवाना किया जिसमें से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारुद बरामद किया गया। बाकी बचे छह लुटेरों ने आत्मसमर्पण कर दिया। भारतीय जंगी पोत के पहरे में एमवी मोड़ के अलावा एमवी सदर्न इंडीपेंडेंट और अर्मिस भी चल रहे थे। जिस समय यह हमला हुआ तब समुद्र में गहरा कुहासा छाया हुआ था और दो मील आगे का रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था।
सूत्रों के अनुसार एमवी मोड़ लाइबेरिया ध्वज के साथ चल रहा था और उसका मालिक नार्वे का था लेकिन चालक दल के सदस्यों में कैप्टन समेत दस भारतीय थे। कैप्टन मनप्रीत भालीवाल ने जंगी पोत आईएनएस को संदेश भेजा की आठ लुटेरे एक स्पीड बोट से उसकी ओर हमले के लिए बढ़ रहे हैं। राहत पुकार मिलते ही आईएनएस तलवार हरकत में आ गया लेकिन लुटेरे एमवी मोड़ के दूसरी ओर चले गए। ऐसे में भारतीय नौसेना ने अपना हेलीकॉप्टर रवाना किया जिसने लुटेरों के हमले को नाकाम कर दिया।
भारतीय नौसेना पिछले साल अक्टूबर से अदन की खाड़ी में तैनात हैं और भारत से सरोकार रखने वाले पोतों को सही सलामत खाड़ी से पार कराने के काम में जुटी हैं जहां से होकर पिछले साल ही भारत का 110 अरब डॉलर का आयात निर्यात हुआ हैं। नौसेना के एक अधिकारी ने कहा कि अदन की खाड़ी से होकर भारतीय पोतों से होने वाला कारोबार घटकर 13 प्रतिशत पर आ चुका हैं लेकिन दूसरे देशों के पोतों से भारतीय कारोबार 87 प्रतिशत तक पहुंच चुका हैं। अधिकारी ने कहा कि इस तरह भारत के राष्ट्रीय दायित्वों का अंतरराष्ट्रीयकरण हो चुका हैं जिससे नौसेना की जिम्मेदारी भी बहुत बढ़ गई हैं।
मसलन की, कल की घटना में ही पोत लाइबेरिया के ध्वज तले संचालित हो रहा था, पोत का मालिक नार्वे का था और इसके चालक दल में भारतीय थे।
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