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भारतीय वायुसेना का हवाई जासूस: “अवॉक्स”
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भारतीय वायुसेना का हवाई जासूस: “अवॉक्स”
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28 मई 2009
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली। आसमान में दुश्मनों का पता लगाने वाले 'एयरबोर्न वार्निग एंड कंट्रोल सिस्टम्स' (अवाक्स) को गुरुवार को भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के बेड़े में शामिल कर लिया गया।
अवाक्स को तय समय सीमा से कुछ विलंब से वायु सेना को सौंपा गया है।
पहले अवाक्स ने इजराइल से उड़ान भरी और भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की निगरानी में यह गुजरात के जामनगर हवाई अड्डे पर उतरा।
अवाक्स हवा में उड़ते दुश्मन के विमानों का पता लगाने और दुश्मन के हवाई संचार को सुनने में सक्षम है।
इस प्रणाली को विशाल परिवहन विमान आईएल-76 में लगाकर उसे नया रूप दिया गया है।
रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने इस प्रणाली को राष्ट्र को समर्पित करते हुए अन्य दो अवाक्स की आपूर्ति को लेकर उत्सुकता प्रकट की।
एंटनी ने अवाक्स को बेड़े में शामिल किए जाने के समय आयोजित समारोह में कहा, "इस परियोजना पर वर्ष 2004 में हस्ताक्षर किए गए थे.. पांच वर्ष लंबा अरसा होता है..मुझे उम्मीद है कि रूस और इजरायल की सरकारों और हमारे लोगों द्वारा की गई कड़ी मेहनत के बाद शेष दो अवाक्स हमें समय पर मिल जाएंगे।"
समारोह में इजरायल और रूस के राजदूत भी मौजूद थे।
अवाक्स परियोजना दरअसल भारत, रूस और इजरायल के बीच हुआ त्रिपक्षीय सौदा है। वर्ष 2004 में तीन अवाक्स का सौदा 1.1 अरब रुपये में हुआ था।
अवाक्स के बेड़े में शामिल होने के बाद भारत अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, जापान, आस्ट्रेलिया और तुर्की की श्रेणी में आ गया है जो इस विशिष्ट प्रणाली से लैस हैं।
पहली बार भारतीय वायुसेना ने अपने खेमे में ‘एवॉक्स विमान’ को शामिल किया हैं। जिसकी ताकत कई गुना ज्यादा हैं। इस विमान को ‘आसमान की आंख’ कहा जाता हैं।
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May 28, 2009
भारत खे लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है / इससे भारत और मजबूत होगा / यह बायू सेना केलिए बहुत ज़ाऱूऱी था /
A.K.Bhadani Panchkula