21 जुलाई 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली। भारत की संस्कृति और परम्परा की पहचान मानी जाने-वाली
साड़ियां अब बॉलीवुड की फिल्मों से गायब होती दिख रही हैं। वह दौर गुजर गया जब
बॉलीवुड अभिनेत्रियां साड़ी में नृत्य करके दर्शकों को मदमस्त कर देती थीं। आज दर्शकों को साड़ी से ज्यादा पाश्चात्य परिधानों में अभिनेत्रियां लुभा रही हैं।
फिल्म ‘सिलसिला’ में स्मिता पाटिल, ‘मिस्टर इंडिया’ में श्रीदेवी, ‘मोहरा’ में रवीना टंडन, ‘कुछ कुछ होता है’ में काजोल, ‘मैं हूं ना’ में सुष्मिता सेन जैसी कितनी ही अभिनेत्रियों ने साड़ी में दमदार नृत्य किया। आज भी उन्हें देखकर दर्शक मंत्र-मुग्ध हो जाते हैं।
पढ़ें: पहनिए आकर्षक ‘बुलेटप्रूफ’ कपड़े! इसके बावजूद आज की फिल्मों में साड़ियां केवल अधिक उम्र की महिलाओं के लिए ही रह गई लगती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आज की पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति के परिधान विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि फिल्मों में भी ऐसे ही परिधान नजर आ रहे हैं।
फैशन डिजाइनर लीना सिंह कहती हैं कि आज की पीढ़ी को पाश्चात्य और मिश्रण (फ्यूजन) परिधान अधिक भाते हैं, लेकिन जल्दी ही साड़ी का जमाना फिर से लौट आएगा।
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साड़ी का
फैशन खत्म नहीं हुआ है। बड़े परदे से वह छोटे पर्दे पर आ चुकी है। छोटे पर्दे पर साड़ी अलग-अलग डिजाइनों और स्टाइल में नजर आ रही है। किसी न किसी अंदाज में हमेशा ही यह फैशन में बनी रहेगी।
लीना सिंह भी मानती हैं कि साड़ी कभी भी पूरी तरह से गायब नहीं हो सकती। यह एक दौर है, जो जल्दी ही निकल जाएगा। हमेशा से ही साड़ी महिलाओं और डिजाइनरों की पहली पसंद रही है। एक बार फिर से साड़ी उसी रूतबे के साथ
फैशन में लौट आएगी।
बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा की फिल्मों में हमेशा से ही अभिनेत्रियां
साड़ी में नजर आती रही हैं, लेकिन अब उनकी फिल्मों में भी पाश्चात्य परिधानों को अधिक तरजीह दिया जा रहा है। डिजाइनर कविता भाटिया के अनुसार आज की युवा अभिनेत्रियां पाश्चात्य परिधानों में ही प्रशंसकों को अधिक लुभाती हैं। यही कारण है कि
बॉलीवुड की फिल्मों में भी ये ही नजर आ रहे हैं।