20 नवंबर 2009
वार्ता
नई दिल्ली। गन्ना मूल्य प्रणाली में फेरबदल करनेवाले गन्ना नियंत्रण संशोधन अध्यादेश को वापस लेने की मांग पर विपक्ष की नारेबाजी और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
एक बार के स्थगन के बाद जब 12 बजे फिर से सदन की कार्यवाही शुरू हुई तब भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया।
कार्यवाही शुरू होते ही समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, वामपंथी दलों के सदस्य नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गए। सदस्य जोर-जोर से ‘काला कानून वापस लो, वापस लो’, ‘किसान विरोधी यह सरकार नहीं चलेगी, नहीं चलेगी’ के नारे लगा रहे थे।
अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार ने नारेबाजी और हंगामे के बीच ही जरूरी दस्तावेज सदन पटल पर रखवाए। स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने इस बीच कुछ प्रस्ताव सदन के पटल पर रखे, जिन्हें ध्वनिमत से रखने की अनुमति दे दी गई. हालांकि इस दौरान शोर-शराबे में कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था। इसके बाद श्रीमती कुमार ने सदन की कार्यवाही सोमवार 23 नवंबर 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
गन्ना मूल्य पर प्रधानमंत्री की आपात बैठक
इससे पहले आज प्रात: सदन की कार्यवाही शुरू होते ही समाजवादी पार्टी के सदस्य सीधे नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के आसन के समक्ष आ गए। उन्होंने गन्ने के दाम बढ़ाने और इस संबंध में जारी अध्यादेश को तुरंत वापस लेने की मांग की। भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने भी इस मांग का समर्थन किया। उन्होंने इस बारे में ‘काम रोको’ प्रस्ताव भी दिया था।
अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने को कहा, लेकिन उन्होंने उनकी बात को अनसुना कर दिया। करीब-करीब समूचे विपक्ष की नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही शुरू होने के बमुश्किल सात-आठ मिनट बाद ही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने और गन्ने की मूल्य प्रणाली में बदलाव पर जारी अध्यादेश के विरोध में किसान आंदोलन कर रहे हैं।
गन्ना किसानों के आंदोलन से दिल्ली जाम
उनकी मांग है कि गन्ने का खरीद मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए। सरकार ने नए संशोधन के अनुरूप गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य 129 रुपए क्विंटल तय किया है। इसके ऊपर अतिरिक्त रिकवरी के लिए अधिक मूल्य देने की भी व्यवस्था इसमें की गई है।