27 अक्टूबर 2009
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग तथा राष्ट्रीय फिल्म पुरालेख, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय फिल्म रसास्वादन पाठ्यक्रम कल यहां आरंभ हुआ।
मुख्य सचिव आशा स्वरूप ने सप्ताह भर चलने वाले इस फिल्म कोर्स का शुभारंभ करते हुए कहा कि इस कोर्स के आयोजन से प्रतिभागियों में फिल्मों के बारे में दूरदर्शी विचारों के साथ आलोचनात्मक दृष्टिकोण व समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।
इंदौर में ‘ग्लोबल सिनेमा समारोह’ का शुभारंभ उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर है जब शिमला में फिल्मों के अध्ययन के बारे ऐसे संक्षिप्त प्रशिक्षण कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। इस कोर्स के आयोजन से हिमाचल, चंडीगढ़, पंजाब राज्यों तथा चेन्नई जैसे स्थानों से आए प्रतिभागियों को फिल्मों के बारे में बहुआयामी जानकारी एवं अनुभव प्राप्त होगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि कोर्स के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को भारतीय एवं विश्व सिनेमा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा तथा इस दौरान प्रदर्शित फिल्मों में क्लासिक फिल्मों को प्रमुखता से शामिल किया गया है जो आमतौर पर दर्शकों को सुलभ नहीं होतीं।
हिमाचल में आयोजित होगा ‘वन्यजीव फिल्मोत्सव’ उन्होंने कहा कि कोर्स में ऐसी फिल्मों को शामिल किए जाने से प्रशिक्षण कोर्स को और अधिक प्रासंगिक एवं लाभप्रद बनाने में मदद मिलेगी। सचिव सूचना एवं जनसम्पर्क रामसुभग सिंह ने इस अवसर पर ‘कोर्स फैकल्टी’ तथा प्रतिभागियों के साथ विचारों को आदान-प्रदान करते हुए इस प्रकार के फिल्म ऐप्रिसेयेशन कोर्स के आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।
फिल्म ऐप्रिसिएशन कोर्स के फैकल्टी मेम्बर अनिल झंकर तथा उर्मिला जोशी ने इस वार्तालाप में भाग लिया। राष्ट्रीय फिल्म पुरालेख पुणे के निदेशक विजय के. जाधव ने कहा कि एन.एफ.ए.आई. द्वारा देश भर में इस प्रकार के फिल्म ऐप्रिसिएशन कोर्सों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि कलाकारों तथा सिनेप्रेमियों में सिनेमा कला के बारे में रुचि पैदा की जा सके।
फिर ठनी निर्माता और मल्टीप्लेक्सों में उन्होंने कहा कि कोर्स के प्रशिक्षणार्थियों को एन.एफ.ए.आई. द्वारा हर वर्ष आयोजित किए जाने वाले एक माह से ऐप्रिसिएशन कोर्स में प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा।