01 अक्टूबर 2009
वार्ता
नई दिल्ली। मिडलवेट वर्ग (75 किलोग्राम) में दुनिया के नंबर एक मुक्केबाज बने
विजेंद्र कुमार का कहना है कि भले ही वह
मुक्केबाजी रिंग की तरह हिन्दी सिनेमा की चमक-दमक भरी दुनिया में भी पूरे आत्मविश्वास से खडे़ नजर आते हैं लेकिन उनका पहला और आखिरी प्यार सिर्फ और सिर्फ मुक्केबाजी हैं।
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ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में देश के लिए कांस्य पदक जीतने वाले 23 वर्षीय
विजेंद्र न सिर्फ अपनी 'डेडली पंच बल्कि डेडली लुक' के लिए भी जाने जाते हैं और यही वजह है कि वह हिन्दी सिनेमा और टेलीविजन कार्यक्रम के भी प्यारे सितारे बन कर उभरे हैं।
विजेंद्र ने 'यूनीवार्ता' से चर्चा में कहा कि नंबर एक का खिताब मिलने पर वह अपने ऊपर और जिम्मेदारी महसूस कर रहे हैं। साथ ही ईश्वर और प्रशंसकों का धन्यवाद भी करते हैं जिनके आशीर्वाद और समर्थन से वह यहां तक पहुंचे हैं।
पढ़ें- विश्व मुक्केबाजी- विजेंद्र ने कांस्य पदक जीता इस सवाल पर कि इन दिनों वह टेलीविजन कार्यक्रम और हिन्दी सिनेमा के नामचीन सितारों के साथ खूब नजर आ रहे और कहीं उनका इरादा भी तो उस रूपहली दुनिया की तरफ रूख करने का नहीं है।
विजेंद्र ने कहा कि मुक्केबाजी की वजह से आज उन्हें पूरी दुनिया पहचानती है। उनका जो भी मान सम्मान है वह एक मुक्केबाज के रूप में ही है।
भिवानी के मुक्केबाज ने कहा कि मुक्केबाजी ही उनका पहला और आखिरी प्यार है और कामयाबी के और शिखर छूना चाहते हैं।
विजेंद्र ने कहा कि विश्व मुक्केबाजी में उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा, लेकिन अब सोने और चांदी के पदकों की झलक बार-बार उनके दिमाग में कौंध रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले मुकाबलों में वह स्वर्ण पदक से कम पर समझौता नहीं करेंगे।
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अक्षय कुमार ,
सुनील शेट्टी और
सलमान खान सहित कई अन्य अभिनेता उनके अच्छे मित्र हैं। उन्हें इस बात की बहुत खुशी है कि फिल्म जगत के सितारे खेल जगत में देश का नाम रोशन करने वालों को बहुत मान सम्मान देते हैं। फिल्म उद्योग से जुडे लोगों का कहना है देश के असली हीरो हमारे खिलाड़ी ही हैं।
देश के शीर्ष खेल सम्मान 'राजीव गांधी रत्न' से सम्मानित
विजेंद्र ने कहा कि विश्व मुक्केबाजी में भारत एक ताकत बन कर उभर रहा है। विश्व रैंकिंग में अनेक भारतीय मुक्केबाजों के नाम शामिल होना भारत की ताकत को दर्शाता भी है। उन्होंने कहा कि हम सफलता का स्वाद चख चुके हैं और अब पीछे मुड़ कर नहीं देखेंगे।
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जी.एस संधू ने कहा कि मुक्केबाजी में भारत की चमकदार सफलताओं की वजह से आज दुनिया उसकी तरफ देख रही है। यह भारतीय मुक्केबाजों का ही दम है कि विश्व मुक्केबाजी में ताकत माने जाने वाले कई देशों के मुक्केबाज भारत आकर हमारे मुक्केबाजों के साथ अभ्यास करने के इच्छुक हैं।
विजेंद्र की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि एक विश्वस्तरीय मुक्केबाज के सारे गुण उनमें हैं। संधू मानते हैं कि इन दिनों
विजेंद्र टेलीविजन कार्यक्रम, मॉडलिंग और हिन्दी सिनेमा में भी व्यस्त हो गए हैं, लेकिन प्रशंसा की बात यह है कि इसके बाद भी मुक्केबाजी ही उनका मुख्य लक्ष्य है।
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अखिल कुमार कहते हैं, विजेंद्र में नंबर एक बनने और लंबे समय तक उस स्थान पर टिके रहने का दमखम है। अखिल ने कहा कि विजेंद्र भारतीय मुक्केबाजों के लिए पथ प्रदर्शक भी बन कर उभरे हैं कि कैसे अपनी प्रतिभा और योग्यता के दम पर हिन्दी सिनेमा और टेलीविजन में भी धाक जमायी जा सकती है।