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13 जुलाई 2009
वार्ता
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के मानपुर थाना क्षेत्र के मदनवाड़ा के पास कल हुई नक्सली मुठभेड़ में पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार चौबे के शहीद होने की खबर से पुलिस विभाग में शोक की लहर छा गई और पुलिस के जवानों की लाशें देखकर पुलिस जवान एवं उनके परिजन अपने आंसू नहीं रोक पाए।
जंगलों में नक्सलियों से लोहा ले रहे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों के लिए दोपहर में भेजा गया गोला बारुद जब कम पड़ने लगा तो आपात स्थिति में हेलीकॉप्टर की आवश्यकता पड़ी, लेकिन इसके बावजूद वाहनों द्वारा गोला बारुद भिजवाया गया। जिससे असलहा-बारूद मौका-ए-वारदात पर पहुंचाने में विलंब हुआ।
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वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं क्षेत्रीय नागरिकों के अनुसार मदनवाड़ा मार्ग पर नक्सलियों ने जिस तरीके से ताबड़तोड़ गोलीबारी की, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नक्सलियों ने घटना के पहले कितनी तैयारी की होगी।
वहीं हमले के लिए डेढ़ किलोमीटर तक की बारदी सुरंग बनाने के लिए उन्हें इतना असलहा बारूद एवं वक्त कैसे मिल गया होगा, यह भी चर्चा का विषय रहा।
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इस बार वारदात को अंजाम देने के लिए माओवादियों ने छापामार युद्ध का इस्तेमाल किया।
पुलिस पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए पेड़ों पर चढ़कर गोलीबारी की गई जिससे जवानों को संभलने का अवसर नहीं मिला।
नक्सलियों ने मदनवाडा मार्ग पर वारदात को अंजाम देने के लिए छापामार युद्ध में पारंगत ‘दलम’ के सदस्यों का इस्तेमाल किया।
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