ख़बरें »
पड़ोस »
अफगान- भारत मैत्री, पाकिस्तान चिंतित
|
|
अफगान- भारत मैत्री, पाकिस्तान चिंतित
|
20 अगस्त 2009
वार्ता
न्यूयार्क। अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार के बाद सत्ता में आयी करजई सरकार से भारत अच्छा मित्र बनने के साथ ही उनके देश के एक प्रमुख दानदाता देश बन गया है जिससे पडोसी देश पाकिस्तान की चिंताएं बढ गई हैं।
अमेरिका से प्रकाशित समाचार पत्र “वॉल स्ट्रीट जर्नल” में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान को 1.2 अरब डालर की मदद देने का वादा करने के साथ ही भारत, उसके लिए अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और कनाडा के बाद पांचवां सबसे बडा दानदाता देश बन गया है।
समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का स्थान जहां एक ओर अफगानिस्तान को मदद देने वाले पांच प्रमुख देशों में शामिल हो गया है वहीं पाकिस्तान का स्थान ऐसे दस देशों की सूची में भी नहीं आ पाया है। भूटान के बाद अफगानिस्तान भारतीय मदद पाने वाला दूसरा सबसे बडा देश बन गया है।
कुओं और शौचालय के निर्माण से लेकर भारत ने अफगानिस्तान में ऊर्जा संयंत्र और उपग्रह ट्रांसमीटर्स का निर्माण करने के अलावा कई अन्य विकास परियोजनाएं शुरू की हैं।
भारत ने अफगानिस्तान को 1.2 अरब डालर की मदद करने का जो वादा किया है इसके अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों में ईरान सीमा के लिए सडक सम्पर्क तथा काबुल में नयी संसद की इमारत शामिल हैं। इसके साथ ही भारत सरकार अफगानिस्तान के नये अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए भारत लाने ले जाने का खर्च उठा रही है।
अफगानिस्तान में भारत के दूत जयंत प्रसाद ने कहा “अमेरिका और अन्य देशों के जैसा ही हमारा प्रयास भी अफगानिस्तान में स्थिर.लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना कराना है।”
हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान को भारत की ओर से दी जाने वाली मदद से वह बिल्कुल चिंतित नहीं है लेकिन वह चाहता है कि दूसरे देश में हस्तक्षेप नहीं करने की नीति का पालन किया जाए।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालस के प्रवक्ता अब्दुल बसीत ने कहा “हम यह स्वीकार करते है कि अफगानिस्तान को विकास के लिए सभी संभव स्रोतों से मदद की दरकार है और यदि कोई ऐसी मदद दे रहा है तो हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है। पाकिस्तान केवल इतना चाहता है कि दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की नीति का कडाई से पालन हो।”
यह खबर आपको कैसी लगी
10 में से 4 वोट मिले
पाठकों की राय 09 फरवरी 2010