04 जुलाई 2009
बड़ी खबरें:
मुस्कान
मुल्ला नसरुद्दीन की दास्तान – 46
अमीर ने बख़्तियार को इशारा किया। एक थैली सूदख़ोर के पैरों के पास आ गिरी, जिसे उसने लालच भरी फुर्ती से लपक लिया। “अगर वह ठीक ऐसी ही हुई तो तुम्हें इतनी ही रक़म और मिलेगी।’ अमीर ने कहा। ‘लेकिन हुज़ूर ज़रा जल्दी कीजिए। मुझे मालूम है कि उस नाजु़क हिरनी का पीछा किया जा रहा है।’
जीवन संपदा
स्वस्थ विचार, सुखी जीवन
गलत विचारों से आप बीमार पड़ सकते हैं, इसी तरह स्वस्थ विचारों से आप चंगे हो सकते हैं।
शायरी
कि यूं होता तो क्या होता...
हुई मुद्दत, कि ‘गालिब’ मर गया, पर याद आता है...
प्रेरणा
जीवन में याद रखें
जो ‘यह स्वीकार,वह अस्वीकार’ का भाव रखता है, वह नासमझ है।
कहानी
गुलाब का फूल
तेनाली राम का बेटा गुलाब का फूल खा गया और बाग से जड़ें इकट्ठी कर अपनी झोली में भर लीं।
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क्या हंसी से जिंदगी हसीन हो जाती है?
हँसने से कुछ नही होता..आदमी का अगर मन प्रसन्न हो तो जिंदगी हसीन तो वैसे ही हो जाती है.. वरना हंसते रहो.. ख़ुसी नही मिलेगी..ज़्यादा हँसने से सामने वाला पागल समझता है.....
parmeshwar jodhpur
Jun 25, 2009
सूबेदार संता और सूबेदार इमामुद्दीन ब्रिटिश फौज के एक ही रेजिमेंट में थे। दोनों आपस में गहरे दोस्त थे। दोनों हर शाम शराब पिया करते। विभाजन के बाद इमामुद्दीन पाकिस्तान चला गया। अपने दोस्त की याद को जिलाए रखने के लिए सूबेदार संता हमेशा दो गिलासों को शराब से भरकर बारी-बारी से चुस्की लिया करता। एक दिन बार के मालिक ने संता से ऐसा करने का कारण पूछा। “यह गिलास इमामुद्दीन है और यह मैं हूं। इसलिए मैं दोनों में से थोड़ा-थोड़ा पीता हूं। एक इमामुद्दीन के लिए और एक मैं अपने लिए।” बार के मालिक ने एक शाम
 
Jun 16, 2009

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