09 फरवरी 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
कविता बजेली दत्त
नई दिल्ली। अगर आपको अपनी आंखें, नाक और होंठ इत्यादि आकर्षक नहीं लगते हैं और कॉस्मेटिक सर्जरी करवाने के बारे में सोच रहे हैं, तो अपना इरादा बदल दीजिए।
दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि सर्जरी के बाद भी ऐसे लोग अपनी सुंदरता को लेकर उतने ही चिंतित रहते हैं, जितना कि वह सर्जरी से पहले होते हैं। कॉस्मेटिक सर्जनों और मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसे लोग ‘बॉडी डायस्पोरफिक डिसऑर्डर’ (बीडीडी) का शिकार होते हैं।
पढ़ें: 2008 में बढ़ेगी चेहरे की कटाई-छंटाई विशेषज्ञों के मुताबिक दर्पण के सामने घंटों गुजारने वाले लोग बीडीडी के शिकार होते हैं। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कॉस्मेटिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक अनूप धीर कहते हैं, “ऐसे मरीजों को सर्जरी के बाद बेहतर महसूस करने के लिए प्रेरित तो किया जाता है, लेकिन सर्जरी के बाद भी अधिकांश लोगों को कोई फर्क नहीं दिखाई पड़ता है”।
डॉ. धीर ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा कि, “कभी-कभी तो लोग अपने रंग-रूप को लेकर चिंतित हो ही जाते हैं लेकिन अगर वह हमेशा ही हाथ, पैर, नाक, बाल इत्यादि शरीर के समस्त अंगों को लेकर परेशान रहेंगे तब कोई न कोई समस्या आ सकती है”।
पढ़ें: नाक के जरिए दिमाग व आंखों की सर्जरी गुरु तेग बहादुर अस्पताल में मनोरोग विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. एम. एस. भाटिया ने बताया कि ऐसे लोग स्वयं के प्रति तिरस्कार के भाव रखते हैं। डॉ. भाटिया कहते हैं कि न केवल चिकित्सकों को बल्कि परिजनों को भी ऐसे लोगों के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।