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पूर्व नशेड़ियों का अनोखा कार्यक्रम
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26 जून 2007
सीएनएन-आईबीएन
नीलू व्यास

नई दिल्ली।
अंतर्राष्ट्रीय नशाखोरी रोकथाम दिवस की पूर्व संध्या पर संयुक्त राष्ट्र का ड्रग और अपराध कार्यालय और भारत सरकार के सहयोग से एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘रीकवरी नाइट’ नाम के इस कार्यक्रम में ऐसे लोगों ने हिस्सा लिया जो नशाखोरी की आदत से छुटकारा पाने की कोशिश में लगे हैं।

‘रीकवरी नाइट’ नशे की लत से उबरने के लिए कड़े प्रयास करने वाले लोगों की जुझारू प्रवृत्ति के प्रति सम्मान जाहिर करने की एक कोशिश थी।

इस कार्यक्रम में कठपुतली शो और आर्यन बैंड के द्वारा एक संगीत कार्यक्रम भी पेश किया गया। नशे की लत से मुक्ति पाए लोगों ने भी कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

ड्रग के नशे से छुटकारा पाना आसान नहीं है। यह कितना कठिन होता है नशे की लत से उबरने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही जान सकता है।

संपत 17 वर्षों से नशे की लत का शिकार रहा है। उस दौरान वह स्मैक, हशीश, भांग यहां तक कि नशे की सुई का भी प्रयोग कर चुका था। उसने उनकी शुरुआत महज मजे लेने के लिए की थी लेकिन अपने नशे की लत से उबरने के दौरान आने वाली कठिनाई आज भी उसे सिहरा देती है।

उसका मानना है कि सिर्फ उसकी इच्छा शक्ति और दृढ़ निश्चय की बदौलत वह नशे की लत से छुटकारा पा सका। सम्पत कहते हैं, “नशे की लत से उबरना और पुनर्वास दोनों साथ-साथ होता है। हालांकि ऐसा बहुत कम मामलों में देखा गया है। अगर कोई नशे की आदत से छुटकारा पाने के लिए आए और सफल हो जाए तो वह काफी खुशनसीब है।“

दिल्ली में रसोईये की नौकरी कर रहे जिया लाल की भी कुछ यही कहानी है। वह 12 वर्षों तक नशे के आदी रहे। आखिरकार पिछले साल से वे नशे की लत से उबरने लगे। नशे के आदी होने के दौरान उन्होंने बहुत कुछ खोया था। सबसे ज्यादा दुःख उन्हें अपने परिवार का भरोसा खोने का है।

जिया लाल कहते हैं, “मेरे भाई-बहन मुझसे ठीक से बात भी नहीं करते थे। अपने ही परिवार में मेरा कोई सम्मान नहीं था। उन्होंने रुपयों-पैसों के मामले में मुझ पर भरोसा करना छोड़ दिया था।”

रीकवरी नाइट के आयोजन के जरिए ड्रग के शिकार व्यक्तियों को नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए उत्साहित करना था ताकि सम्पत और जिया लाल जैसे लोग सबके सामने आकर अपने भय से मुकाबला कर सके।

नशे से उबरने में बहुत पीड़ा होती है लेकिन एक बार उबर जाने के बाद सब कुछ अच्छा हो जाता है। यह लोगों की इच्छा शक्ति को उत्सव के रूप में मनाने का कार्यक्रम था।

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