27 फरवरी 2008
आवाज़ समाचारइस बार के रेल बजट में कहा गया कि 25 हजार करोड़ रुपए की नकद बचत हुई है। इस नकद बचत में आम आदमी की एक अहम हिस्सेदारी होती है। लेकिन एक आम आदमी के लिए रेलवे का सफर आसान नहीं होता है। आरक्षण से लेकर साफ-सफाई और सुरक्षा संबधी कई तरह की ऐसी दिक्कतें हैं जो आम आदमी को रेलवे सफर में झेलनी पड़ती है।
मैं अपनी जेब से कुछ नहीं देता- लालू जब रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव से यह सवाल पूछा गया कि एक आदमी के लिए इस नकद बचत का क्या मतलब है? तो उनका जवाब यही था कि आप इस देश के लिए कितना भी काम करें लेकिन नकारात्मक सोच रखने वाले आपका जरुर विरोध करेंगे।
लालू ने कहा, “भारतीय रेल की जो स्थिति थी वो जग जाहिर है। हमने भारतीय रेल सेवा को एक नया आयाम दिया। भारतीय रेल की कल की हालत और आज की हालत के बारे में पूरी दुनिया जानती है। आज रेलवे की सारी बड़ी उपलब्धियों को छोटी नकारात्मक बातों से दबाना नहीं चाहिए। हम दुनिया में सबसे सस्ती रेल सेवा मुहैया करा रहे हैं।”
जब लालू हुए कवि और शायर.. लालू यादव ने भाजपा की ‘इंडिया शाइनिंग’ नारे पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि ‘इंडिया शाइनिंग’ की बात जिस समय हो रही थी उस समय रेलवे स्टेशनों पर मक्खियां भिन्न-भिन्न करती थीं। लेकिन हमने साफ-सफाई को प्रतिस्पर्धी बना कर कर्मचारियों को ईनाम देकर इसे बेहतर करने की कोशिश की है।
उन्होंने देश के नागरिकों के रहन-सहन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें साफ-सफाई की फिक्र नहीं है। उन्हें इस बात की समझ ही नहीं है कि बेहतर साफ-सफाई कैसे रखी जाए। उन्हें जागरुक होना पड़ेगा।
मेल-एक्सप्रेस के किराए 5 प्रतिशत घटे कभी निजीकरण का विरोध करने वाले लालू यादव ने निजीकरण पर कहा कि हम रेलवे के कुछ निश्चित क्षेत्रों में पैसे की जरुरतों को पूरा करने के लिए निजी क्षेत्र की भागिदारी बढ़ा रहे हैं।
उनकी बातों से यही पता चलता है कि लालू प्रसाद यादव एक मंजे हुए राजनीतिज्ञ के साथ-साथ एक अच्छे व्यवसायी भी बन गए हैं।
पाठकों की राय 09 फरवरी 2010
May 08, 2008
लालू ने जनता को लूटा हे . तत्काल के रुपये वापस न देकर एक प्रकार से लूट मचाई हे. रेल के पास एकाधिकार हे. वो जनता को जेसे चाहे वेसे लूट सकती हे.. व्यस्त समय का लाभ उठा कर माल भाड़ा 5 से 7% बढ़ा दिया. ऐसा सभी उत्पादको को करने का अधिकार सरकार क्यो नही करती हे.
pukhraj s shah solapur
Mar 03, 2008
संपादक ज़ी, भारत में टैक्स ज़्यादा है, जैसे- वैट, ओक्टरोई, एक्साइज़ जिससे चीन व पाकिस्तान की वस्तु सस्ती पड़ती है। इससे ये देश आर्थिक रूप से मज़बूत होंगे और हम आर्थिक रूप से कमज़ोर होंगे। इन तीनों के बदले आय कर का एक स्तर और बढ़ाना चाहिए (40%वाला)...ये तीनों टैक्स मामूली या नहीं के बराबर करना चाहिए...आर्थिक रूप से चीन व पाकिस्तान को हारने की ज़रूरत है...।
pukhraj s shah solapur
Mar 03, 2008
संपादक ज़ी, जिस तरह रेलवे तत्काल कोटा के नाम से जनता की जेब ख़ाली कर रही हैं और ई-टिकीट इंडियन रेल टूरिज़्म व कैटरींग के नाम से सर्विस टैक्स वसूल कर रही है, इसी तरह व्यापारी को भी तेल, चीनी वगैरह बेचने में भी तत्काल क़ोटा, दूसरी दुकान द्वारा माल बेचकर सर्विस टैक्स (दूसरी दुकान का मुनाफ़ा) लेने की छूट देनी चाहिए...दो प्रकार के क़ायदे क्यों? व्यापारी को भी ज़्यादा मुनाफ़ा लेने की छूट देनी चाहिए। इस पर रिटेन पेटीशन दाखिल करनी चाहिए....व्यापारी कमाया तो आय कर तो भरेगा...
pukhraj s shah solapur
Feb 28, 2008
अच्छी खबर है।
Palak joshi Ratlam
Feb 28, 2008
लालूजी सच ही कह रहे हैं, जेब से कुछ नहीं देते है लेकिन ये बताएं की जेबवा में कितना लेते है?
abhijeet patna
Feb 27, 2008
लालू जी आपने ये तो बता दिया कि आप अपनी जेब से कुछ नहीं देते है, लेने की भी कुछ बता दीजिए।
nirdosh sharma noida
Feb 27, 2008
रेलमंत्री लालू जी कहते है कि मैं अपनी जेब में कुछ भी नहीं रखता.....सही बात है ...जेब में रखने का ज़माना ही नहीं है, बैंक कब काम आएँगी?
nirdosh sharma noida
Feb 27, 2008
ख़ूब बेवकूफ़ बना रहे है जनता को। किराया कम करो और अन्य चार्ज बढ़ाते जाओ।
lina nagpur