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शीर्ष तीन वैज्ञानिक परमाणु करार के खिलाफ
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24 जून 2008
वार्ता

नई दिल्ली।
देश के तीन शीर्ष वैज्ञानिकों ने कहा है कि भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग करार पर निगरानी समझौते के लिए सरकार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के पास तत्काल नहीं जाना चाहिए।

परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पी.के. अयंगार, परमाणु ऊर्जा नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ए. गोपालकृष्णन तथा भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के पूर्व निदेशक डॉ. ए.एन. प्रसाद ने आज यहां एक संयुक्त बयान जारी कर सरकार से यह अपील की है।

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बयान में इन वैज्ञानिकों ने कहा है कि देश के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिकों ने पहले भी परमाणु समझौते पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है और हमने प्रधानमंत्री तथा सांसदों को पत्र भी लिखा था तथा प्रधानमंत्री ने हमें इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए समय भी दिया था और हम उनसे मिले भी थे।

बयान में कहा गया है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ निगरानी समझौते की विस्तृत जानकारी संप्रग-वाम समन्वय समिति को दिए बगैर परमाणु उर्जा एजेंसी के पास जाने वाली है, जबकि देश के वैज्ञानिक समुदाय में इस करार को लेकर काफी असंतोष है।

बयान में इन वैज्ञानिकों ने आगे कहा है- इसलिये हमारा यह मानना है कि जब तक संप्रग-वाम समन्वय समिति में या विशेषज्ञों के साथ इस करार के प्रभाव के बारे में स्थिती स्पष्ट रूप से बहाल नहीं हो जाती, तब तक हमें परमाणु ऊर्जा एजेंसी के पास नहीं जाना चाहिए।

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बयान में कहा गया है कि सरकार इस आधार पर यह समझौता कर रही है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों का आयात हो सकेगा, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार परमाणु ऊर्जा से उत्पन्न बिजली पारम्परिक जल एवं ताप संयंत्र से प्राप्त होने वाली बिजली से तीन गुना महंगी होगी।

बयान में यह भी कहा गया है कि एक बार समझौता हो जाने से न केवल अमेरिका बल्कि अन्य देशों से परमाणु कारोबार ‘हाईड एक्ट’ से संचालित होगा और करार ‘123 समझौते’ से नियंत्रित होगा। इस तरह देश की विदेश नीति भी प्रभावित होगी।

बयान में वैज्ञानिकों ने कहा है कि जब तक परमाणु विशेषज्ञों को तथा संप्रग-वाम समन्वय समिति को निगरानी समझौते के दस्तावेज दिखाए नहीं जाते, तब तक इस करार पर हस्ताक्षर नहीं होने चाहिए।

अमरीका ने दोहराया '..तो करार रद्द'


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09 फरवरी 2010
Jul 08, 2008
क्या भारत मैं सिर्फ़ ये तीन ही ससीएंटिस्ट हैं बाक़ी सभी 3000 से भी ज़्यादा ससीएंटिस्ट बेवकूफ़ हैं जो ईसस स्मझोते के साथ हैं बाही ये समझोटा देश हित मैं हैं तभी बाक़ी सबाही ईसस समझोटे के साथ अहीं तो इन 1% के लिए देश को पिच्छे मत धकेलो ओर वैसे भी 100% एफ़्फ़ीसिएनस्य कभी नही मिल सकती सेकोंड लव ओफ़ थेरमोदयनामिक्स तीस इस थे उनिवेरसल ट्रूथ लव
ritesh nagpur
Jul 08, 2008
सच मे ये देश बेचने की साज़िश है कांग्रेस अब तो हद से ऊपर जा रही है यूरेनियम को तो देख रहे है जो विदेश से आएगा लेकिन देश मे पर्याप्त मात्रा मे उपलब्ध थोर इयम की तकनीक के वेग्यानिको को पीछे धकेल रहे है क्या हित है इन नालायको का. भगवान इन्हे अक्ल दे . अच्छा हो यदि सरकार गिर जाए. संजय
SANJAY NOIDA
Jun 25, 2008
इन सब पार्टियों को सोचना चाहिए की तेल हमेशा नहीं रहेगा और जब तक रहेगा इतना मेहंगा हो जाएगा उन देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा जायगी जो तेल पर निर्भेर करेंगे देश इनके नाटक को देख रहा है धीरे क्योटो प्रोटोकोल सख़्त होगा तो साफ़ उर्जा कहाँ से लाएँगे अगर नुकलेार उर्जा नही अपनाएँगे तू क्या करेंगे अभी उगर समझौता नहीं करेंगे तो तकनीक में पिचछर ज़ायगे .सब वागयानिको को भी एक मंच पा आ कर एक बार देस को बताना चाहीय क्या सही है सब प्रोजेक्ट किसी ना किसी स्टागे पर विदेशी तकनीक पर निर्भर करते है तो हमें सब सोच कर निर्णय लेना चाहिए जनता को येह ढयान रखना होग की यदि हम देश का भला चाहते है तो केंद्र में मज़बूत सरकार रहे येह तभी संभव है जब दो पार्टय सिस्टें हो क़ानून बनानेवाले कब ये क़ानून बनाएँगे???
astro trivendrum
Jun 25, 2008
मेरे प्यारे देश वाशियो , क्या आपको पता है 123 नुकलेयर समझोटा देश हित मे नही है. कोंगरेस ( सोनिया विदेशी महिला ) देश से बदला लेने के लिए देश को ही बेच देना चाहती है . सबसे बड़ी बात इस से बनने वाली बिजली 2 से 3 गुना माहगी होगी . हमारे वेग्यानिक इश् का विरोध कर रहे है .देश की सुरक्षा को ख़तरा है . अमेरिका का फ़ायदा है तभी तो इतना तेल लगा रहा है कोई क्यो नही सोचता की अमेरिका इश् के पीछे क्यो लगा है भारत इश् समझोटे के बाद अमीरीका का ग़ुलाम हो जाएगा. कोई भी समझोटा आज़ के आधार पर करो नेक्शट पीढ़ी को गिरवी रख कर समझोटा नही करना चाहिए. अमेरिका हमारी तरर्की से बोखला गया है .वह किसी भी तरीक़े से भारत को रोकना चाहता है . पहले भी भारत पर कड़े परटिबंध लगा रखे है आज़ तक नही हटाए है देश की जनता को इश् समझोटे को जानने का अधिकार है .कोंग्रेस -----जनता वेग्यानिक आदि से क्यो छिपा रही है , इन नेताओ के घर कितने पैसे पहुँचे , सब इंक़ूआरई होनी चाहिए . अमेरिका हाइड एक्ट के तहत देश के हेर एक्ट मे घुषना चाहता है . गोरे कभी इश् देश के साथ नही है सदा ही एन्नोहोने भारत को लूटा आज़ भी इनका पेट नही भरा . भारत की सभी बड़ी कोंपनी मे इनका बड़ा अधिकार है ( शरे ख़रीद किए है )हमारे देश के बहूत से लोग बिकाऊ है उनका फ़ायदा गोरे उठा रहे है . बी सी बोतरा देली 92
b c bothra delhi
Jun 25, 2008
पते की बात तो यहा हे की किसी से भी नही पूछो , बस यहा देखो की यहा समझौता देश के लिए अच्छा है या नही .................????????????????? भाई अगर फायदे की बात हे तो ,,,, कर लो ,,,,, नही तो छोड़ दो ,,,,,, भाई याद रखना आने वाले चुनाव मे पड़े लिखे लोगो को ही वोट देना ,,, ताकी वो काम कर सके ,,,, ओर भाई ,,, सोंच समजकर ही किसी पार्टी को वोट देना ,,,, ओर सारे वोट किसे एक ही पार्टी को ही देना ,,,,,,,,, ताकी ये वामपंति वाले ,, बीच मे नही आए >>>>> हमारे नेता लोग वामपंति के कारण कोई भी काम ठीक ढंग से नही कर पाएगे ,,,,, जय हिंद जय भारत ,,,,,,,,,?????? ,, देश का सुभ चिंतक
jay indoer
Jun 25, 2008
सरकार को देश के सब आणविक वेग्यानिकों की बात पर गौर करना चाहिए और साथ ही विदेश नीति पर होने वाले असर का भी पूरा विश्लेषन करना चाहिए.
shweta delhi
Jun 24, 2008
में इस समाचार में विसवास नही करता. मेडिया को केवल प्रामाणित समाचार ही छापना चाहिए.
Rahul London
Jun 24, 2008
जब यू पी ए का शासन इतना दुर्बल है, की वाम पंथियों के बैसाखी के बल चल रहा है, ---भारत के हित मे, खुली खुली चर्चा होनी चाहिए| और कुछ निर्णय सरल सरल हाँ, या ना, मे सोचने के पहले, हर प्रकार के कितना लाभ और कितनी हानि---इसका विगत वार सोच वृत्त पत्रों मे --खुला खुला हो| विशेषज्ञ अपनी राय व्यक्त करें, देश हितैशी भी अपनी बात रखे-----इसके आधार पर "सारासार" विवेक से निर्णय लिया जाए| विरोधी पक्ष भी शासन से देश हित मे सही निर्णय को सम्मति देने आगे आए| सारी शंकाए और प्रश्न देशके हित मे मिल जुल के सुलझाए| इतना बड़ा निर्णय कोई जुआ नही है| देश किसी परिवारकी निजी बपोती नहीं है| हित चिंतक
Hit Chintak Boston
Jun 24, 2008
यह तीन वैज्ञानिक बताएँ की यूरेनियम का प्रबंध कहाँ से करेंगे...क्या सभी परमाणु उर्जा पैदा करनेवाले रिएक्टर को बंद कर दिया जाए?
DrSShankarSinghh New Delhi
Jun 24, 2008
ये लोग जो कह रहे हैं सही है...ये नेताओं की तरह झूठ नहीं बोलते, ये हमारे वही वैज्ञानिक जिन्होनें ये सब बनाया है और जो इन नेताओं से ज्यादा दिमाग़ वाले हैं!
Ash Shivpuri (M.P.)
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