16 जुलाई 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
अमेठी। युवा सांसद व कांग्रेस के महासचिव
राहुल गांधी के मुताबिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता देशहित में है और देशहित में प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह ने अपनी सरकार की परवाह किए बगैर करार पर आगे बढ़ने का कदम उठाया है।
राहुल का कहना है कि परमाणु करार के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा लिए गए इस फैसले का वे सौ फीसदी समर्थन करते हैं।
करार के लिए कोई भी कुर्बानी मंजूर: राहुल उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने जिस हिम्मत, दूरदृष्टि और कुशल नेतृत्व का प्रदर्शन किया है, मुझे उसपर गर्व है”।
अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर गए राहुल ने संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि लोकसभा में विभिन्न दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी युवा सांसद परमाणु करार को देशहित में मानते हैं।
उन्होंने कहा, “सभी युवा सांसद चाहे वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ही क्यों न हों, करार का समर्थन करते हैं। मुझे एक भी ऐसा युवा सांसद नहीं मिला जो परमाणु करार के विरोध में हो”।
परमाणु करार को वैज्ञानिकों का समर्थन राहुल ने कहा, “करार के मामले में मैं सौ फीसदी प्रधानमंत्री के साथ खड़ा हूं। यदि देशहित में वे कोई कदम उठा रहे हैं, तो ऐसे में आंकड़ों का कोई मतलब नहीं होता। उनकी सरकार विश्वास मत हासिल करने में असफल रहती है, तो रहने दीजिए”।
उन्होंने कहा कि कोई बड़ी उपलब्धि पाने के लिए कभी-कभी सरकार को जोखिम भी उठाना पड़ता है।
परमाणु करार पर डॉ. मनमोहन सिंह के रुख पर कांग्रेस में उभरे विरोध के स्वर के सवाल पर गांधी ने कहा, “पार्टी के वरिष्ठ नेता इस बात से सहमत हैं कि प्रधानमंत्री ने यदि कोई फैसला किया है तो निश्चिततौर पर वह सही होगा”।
परमाणु करार-सरकार का लेखाजोखा राहुल ने कहा कि परमाणु करार का जिस प्रकार से विरोध हो रहा है, उसे देखकर मुझे अपने पिता स्वर्गीय राजीव गांधी द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी की दिशा में उठाए गए उस कदम की याद आती है, जिसका लोगों ने पुरजोर विरोध किया था।
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