08 जनवरी 2009
वार्ता
नई दिल्ली। देशभर के व्यापारियों और लघु उद्यमियों के शीर्ष संगठन भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने ट्रांसपोर्टरों के चक्का जाम को समर्थन देने की घोषणा की है। व्यापारियों ने आज यहां कहा कि यदि समय रहते यह मसला नहीं सुलझा तो देशभर की थोक व्यापारिक मंडियों के कारोबारी भी हड़ताल पर जा सकते हैं। व्यापारिक नेताओं ने पत्र लिखकर सरकार को चेतावनी दी है कि सरकार तुरंत डीजल, पेट्रोल और रसाई गैस के दाम कम करे अन्यथा व्यापारी वर्ग सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगा।
तेल कर्मचारियों की हड़ताल शुरू, रिफाइनरी ठप भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (बीयूवीएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व श्याम बिहारी मिश्रा और राष्ट्रीय महामंत्री विजय प्रकाश जैन ने संयुक्त बयान में कहा कि ट्रांसपार्टरों की मांगें जायज हैं। एक ओर सर्विस टैक्स विभाग के अधिकारी मनमानी कर रहे हैं दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम घट जाने के बावजूद सरकार तेल कम्पनियों को फायदा पहुंचाने के लिए डीजल के और पेट्रोलियम उत्पादों के दाम नहीं घटा रहीं।
दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा, “ट्रकों के चक्का जाम के कारण देश भर की थोक और उत्पादक मंडियों में काम बंद हो गया है। हड़ताल के कारण न माल आ रहा है और न ही कहीं जा पा रहा है। ऐसे में थोक कारोबारी कब तक दुकानें खोले रखकर अपना खर्चा बढ़ाते रहेंगे। इससे अच्छा है कि थोक मंडियों के कारोबारी भी दुकानें बंदकर हड़ताल पर चले जाएं।”
ट्रक हड़ताल से रोज 10 अरब रुपए का घाटा उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने ट्रांसपोर्टरों की बात मानते हुए चक्का जाम नहीं खुलवाया और यदि ट्रांसपोर्टर विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर उतरते हैं तो देशभर की थोक और उत्पादक मंडियों के थोक कारोबारी सड़कों पर उतर कर ट्रांसपोर्टरों का साथ देंगे।