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भारतीय विमानवाहक पोत का निर्माण शुरु
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28 फरवरी 2009
वार्ता

कोच्चि।
आजाद भारत की सबसे महत्वांकाक्षी परियोजना के तहत देश के अपने विमानवाहक युद्धपोत का निर्माण कार्य आज से यहां शुरु हो गया।

रक्षामंत्री एके. एंटनी के इलैक्ट्रॉनिक बटन दबाते ही करीब दो सौ टन का एक ब्लॉक कोच्चि शिपयार्ड लिमिटेड की शुष्क गोदी ‘ड्राई डॉक’ में उतार दिया गया, जहां 265 मीटर लंबे इस पोत को अगले 22 महीने में बना लिया जाएगा।

 

विमानवाही पोत बनाने वाला चौथा देश होगा भारत

इस जंगी पोत के निर्माण के साथ ही भारत विश्व का मात्र चौथा ऐसा देश बन रहा है, जो 40 हजार टन का विमानवाहक पोत रखते हैं। अभी अमेरिका, रूस और फ्रांस के पास ही इस तरह के पोत हैं।

आज से इस विमानवाहक पोत के 873 खंडों को जोड़ने का काम शुरु हो गया। इनके लिए 8100 टन की स्टील प्लेटें काटी जा चुकी हैं। शिपयार्ड के 400 विशेष रूप से दक्ष कर्मी इस काम में लगाए गए हैं और 130 कम्प्यूटरों पर इसका डिजायन चल रहा है।

3 हजार 260 करोड़ की आरंभिक लागत से शुरु हुई इस परियोजना का पहला चरण दिसम्बर 2011 में और दूसरा चरण 2014 में पूरा हो जाएगा।

निर्माण कार्य शुरु करने की घोषणा करते हुए एंटनी ने कहा कि अगले एक दशक में भारत एक साथ दो से तीन विमानवाहक पोतों पर काम कर रहा होगा।

 

पाक की नाक के नीचे हुआ युद्धाभ्यास

इस मौके पर नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुरेश मेहता ने घोषणा की कि निकट भविष्य में नौसेना एक और स्वदेशी विमानवाहक पोत का निर्माण कार्य शुरु करने का आदेश देगी। इनके अलावा भी पांच विभिन्न प्रकार के पोत बनाए जाने की योजना है।

उन्होंने कहा कि नौसेना ने शिपयार्ड को 200 करोड़ रुपए की राशि पहले ही जारी कर दी है।

कोच्चि शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर एम. जितेन्द्रन ने बताया कि यदि उनके शिपयार्ड को दूसरे ऐसे ही जंगी पोत का ऑर्डर मिला, तो हम 4 से 5 वर्ष के बीच उसे भी बना सकते हैं।

विमानवाही पोत ‘एडमिरल गोर्श्कोव’ को लेकर रूस के नखरों से आजिज आ चुके भारत ने अपने विमानवाही पोत के निर्माण का काम तेज करने का निर्णय लिया है। इस पोत की ‘कील’ बिछाने के काम की यह शुरुआत बहुत बड़ा कदम है।

 

भारतीय नौसेना रूस से लेगी मारक युद्धपोत

किसी पोत की ‘कील’ बिछाने का काम जहाज की रीढ़ लगाने की तरह माना जाता है जिसपर पोत का निर्माण होगा। तीन साल पहले इस पोत की प्लेटें काटी गई थीं और अब ‘कील’ बिछाने के साथ ही इसका निर्माण जोर पकड़ लेगा।

भारत का यह अपना पोत ‘आईएनएस विराट’ से भी अधिक विशाल और उससे कहीं अधिक भारी होगा।

इस भारतीय पोत की लम्बाई 252 मीटर और चौड़ाई 58 मीटर होगी। इस पर 30 विमान तैनात किए जा सकेंगे और रूस से खरीदा गया लड़ाकू विमान ‘मिग 29-के’ तथा भारत का अपना लड़ाकू विमान ‘तेजस’ यहां से ‘शॉर्ट टेक ऑफ’ ले सकेगा और ‘एरेस्टेड रिकवरी’ की व्यवस्था होगी, जिसमें विमान के नीचे से हुक निकलता और जो रनवे पर बिछे केबल को पकड़कर विमान को तेजी से खींचकर रोक देता है।

 

रूस ने युद्धपोत के लिए 2 अरब और मांगे

भारतीय पोत करीब चालीस हजार टन की जल विस्थापन क्षमता का होगा, जबकि ‘आईएनएस विराट’ 28 हजार टन की जल विस्थापन क्षमता का है। ‘विराट’ पर छह लड़ाकू विमान ही खड़े हो पाते हैं। भारत में विकसित किए जा रहे विमानवाही पोत के हैंगर में भी 17 विमान खड़े हो सकेंगे।



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