29 अप्रैल 2009
वार्ता
नई दिल्ली। रक्त की मात्र एक बूंद या फिर एक अति सूक्ष्म उत्तक की जांच से डॉक्टर अब यह पता लगा सकेगें कि किसी व्यक्ति को कैंसर है या नहीं या फिर अमुक दवा का कैंसर रोगी पर कैसा असर हो रहा है।
स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसन के वैज्ञानिक इस तकनीक पर व्यापक अध्ययन करने में जुटे हैं। यह अध्ययन एक खास प्रकार की मशीन की मदद से किए जा रहे हैं। जो यह बता देगी कि एक बूंद रक्त या अतिसूक्ष्म उत्तक में कैसर से सम्बद्ध प्रोटीन मौजूद है या नहीं और यह भी कि उपचार का रोगी पर कैसा असर हो रहा है।
पढ़ें: मूत्र जांच से पता चल जाएगा फेफड़ों का कैंसर वैसे तो यह अध्ययन खासतौर पर रक्त कैंसर की जांच के लिए किया जा रहा है लेकिन अनुसंधानकर्ताओं को आशा है कि उनकी यह तकनीक कैंसर ग्रस्त ट्यूमर का पता लगाने में कामयाब हो सकेगी।
नेचर मेडिसन पत्रिका में इस अभियान के नेता तथा ऑनकोलॉजी विभाग के डॉक्टर एलिस फैन के हवाले से कहा गया है कि फिलहाल कैंसर का उपचार करते हुए डॉक्टर को यह पता नहीं चलता कि रोगी के टयूमर की कोशिकाओं के भीतर क्या चल रहा होता है।
पढ़ें: कैंसर के एक और जीन की खोज डॉक्टर दवा का असर देखने के लिए कई हफ्ते का इंतजार करते हैं और तब जाकर जान पाते हें कि टयूमर सिकुड़ रहा है। लेकिन इस मशीन की मदद से डॉक्टर कभी भी यह जान सकते हैं कि कैंसर ग्रस्त ट्यूमर सिकुड़ना शुरू हो गया है या नहीं।