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26 जून 2009
वार्ता
लखनऊ। विवादित भाषणों से सुर्खियों में आए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद वरुण गांधी पर अदालत में अभियोग चलाने के लिए पीलीभीत जिला प्रशासन ने सरकार से अनुमति मांगी है।
लोकसभा चुनाव के दौरान विवादित भाषण देने के कारण पिछली 28 मार्च को गांधी को पीलीभीत में बन्दी बना लिया गया था। अगले ही दिन उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी तामील करा दिया गया था।
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उनपर साम्प्रदायिक आधार पर समाज को बांटने की साजिश करने का आरोप लगा था।
पीलीभीत के जिलाधिकारी ने कल शाम विशेष संदेशवाहक से सांसद गांधी पर मुकदमा चलाने का अनुमति-पत्र सरकार को भेजा है। यदि अनुमति मिल जाती है तो पीलीभीत पुलिस आरोप-पत्र दाखिल कर सकेगी।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार न्याय विभाग से अनुमति मिल जाने की पूरी संभावना है।
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अनुमति मिलते ही उनपर धारा- 153 (ए) के तहत आरोप-पत्र दाखिल कर दिया जाएगा।
गांधी के खिलाफ पीलीभीत में तीन मामलों में मुकदमे दर्ज हुए थे। उन्होंने 7 मार्च को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान आपत्तिजनक भाषण दिए थे।
इससे पहले राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) बृजलाल ने कहा था कि गांधी के खिलाफ आरोप-पत्र तैयार हैं।
8 मार्च को पीलीभीत के बरखेरा गांव में दिये विवादित भाषण के संबंध में गांधी के खिलाफ पहला मामला 17 मार्च को दर्ज हुआ था। दूसरा मामला विवादित भाषण के लिए ही चुनाव आयोग ने दर्ज कराया था।
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तीसरा मामला गांधी के खिलाफ पीलीभीत के देशनगर इलाके में 7 मार्च को दिये भाषण के बाद 19 मार्च को दर्ज हुआ था।
भाषणों को तोड़मरोड़ कर पेश किये जाने के आरोप के बाद पुलिस ने गांधी के भाषणों की सी.डी. फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजी थी। लैब ने सी.डी. में छेड़छाड़ नहीं होने की पुष्टि की थी।
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