|
|
|
|
|
| बड़ी खबरें: |
| ads by google |
24 जुलाई 2009
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा 15 वर्ष पुराने सभी व्यावसायिक वाहनों पर प्रतिबंध लगाए जाने संबंधी आदेश को लागू करने के सरकार के निर्णय के विरोध में पश्चिम बंगाल के व्यावसायिक वाहन संचालकों ने शुक्रवार को हड़ताल कर दी। हड़ताल के कारण राज्य में जनजीवन लगभग ठहर-सा गया।
पूरे कोलकाता में कई बस व ऑटो स्टैंड के सामने इन वाहनों की कतारें देखी गईं। परिवहन मंत्री सुभाष चक्रबर्ती के दावे के बावजूद गिनी-चुनी सरकारी बसें ही सड़कों पर उतरीं।
हावड़ा जिले के एक बैंक कर्मचारी असीम दत्ता ने कहा, “हम संकटकालीन समय का सामना कर रहे हैं, क्योंकि इस परिवहन हड़ताल के कारण हम अपने कार्यालय नहीं जा सकते। मुझे कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेना था लेकिन मैं वहां नहीं पहुंच सका”।
थोक व्यापारी भी हड़ताल कर सकते हैं
व्यावसायिक वाहन संचालकों के कम से कम 17 समूहों द्वारा आयोजित हड़ताल के मद्देनजर यहां के तमाम निजी स्कूलों ने शुक्रवार को अवकाश घोषित कर दिया। कलकत्ता विश्वविद्यालय औैर कई सारे अन्य शिक्षण संस्थानों ने शुक्रवार को होने वाली परीक्षाएं रद्द कर दी।
कोलकाता महानगरीय इलाके में जहां यह हड़ताल अनिश्चितकालीन है, वहीं राज्य के बाकी हिस्सों में वाहन संचालकों ने शुक्रवार को एक दिन की ही हड़ताल की है।
ज्ञात हो कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जुलाई 2008 में पहली जनवरी 1993 से पहले के पंजीकृत सभी व्यावसायिक वाहनों पर कोलकाता और कोलकाता के बाहरी इलाकों में प्रतिबंध लगाए जाने का आदेश दिया था। आदेश में कहा गया था कि कोलकाता महानगरीय इलाके में इस आदेश को 31 दिसंबर 2008 तक लागू कर दिया जाए। कोलकाता महानगरीय इलाके के तहत उत्तर व दक्षिण 24 परगना, हावड़ा और हुगली जिले आते हैं।
ट्रक हड़ताल से रोज 10 अरब रुपए का घाटा
बाद में राज्य सरकार की एक याचिका पर आदेश को लागू करने की तारीख 31 जुलाई 2009 तक बढ़ा दी गई।
अब राज्य सरकार ने अदालत का आदेश लागू करने के लिए 25 जुलाई से पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने का फैसला किया है।
| ads by google |

ख़बरें
सबसे ज्यादा पाठकों की राय
तस्वीरें
सबसे ज्यादा पाठकों की राय
वीडियो
सबसे ज्यादा पाठकों की राय
क्रिकेट समाचार