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आर्थिक संकट से सबक लें अमेरिकी: ओबामा
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15 सितम्बर 2009
एजेंसियां


अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि कर से मिलने वाली पूंजी को बैंकों में लगाना सही फैसला था लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका आगे भी वित्तीय संस्थानों की भरपाई करेगा।

ओबामा ने कहा कि मंदी के खतरनाक लम्हों से मिले सबक को भूलना बड़ी गलती होगी।

ओबामा ने सोमवार को वॉल स्ट्रीट पहुंचने के मौके पर कहा, “हमें लीमैन ब्रदर्स के धराशायी होने की घटना से सीख लेते हुए वित्तीय तंत्र में व्यापक सुधारों को तत्काल गति देनी होगी।”

महात्मा गांधी मेरे वास्तविक नायक: ओबामा

दरअसल लीमन ब्रदर्स के डूबने के साथ ही यह पक्का हो गया था कि दुनिया आर्थिक संकट में फंसने जा रही है, उसके बाद अमेरिका के दूसरे बड़े वित्तीय संस्थान भी डूबने लगे जिन्हें आखिरकार अमेरिकी सरकार को बचाना पड़ा।

उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था सुधर रही है इसका यह मतलब नहीं है कि हम वित्तीय सुधारों को ठंडे बस्ते में डाल दें। दुर्भाग्य से आज वित्तीय क्षेत्र में कई ऐसे लोग हैं जो हालात में मामूली सुधार से ही निश्चिंत हो गए हैं और पुरानी गलतियां से सबक नहीं लेना चाहते जबकि हकीकत यह है कि आगे दोबारा हालात बुरे न हों इसके लिए बाकायदा नए कानून बनाना और वित्तीय तंत्र पर कड़ी निगरानी रखना बेहद जरूरी हो गया है।

ओबामा ने सुझाए बचत के नए नुस्खे

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हालांकि देश में आई आर्थिक मंदी के लिए सरकार और वित्तीय तंत्र को अकेले जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा इसके लिए आम अमेरिकी नागरिक भी बराबर के दोषी हैं। क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर इन लोगों ने अपनी हैसियत से ज्यादा खर्च कर पूरे देश को संकट में डाला है।

ओबामा ने कहा कि यह हालात इसलिए पैदा हुए क्योंकि बाजार पर नियंत्रण के लिए एक सक्षम तंत्र का अभाव था इसलिए उनका प्रशासन केन्द्रीय बैंक ‘फेडरल रिजर्व’ की निगरानी में एक उपभोक्ता वित्तीय संरक्षण एजेंसी (सीएफपीए) गठित करने को प्राथमिकता दे रहा है।

अमेरिका, भारत स्वाभाविक मित्र: ओबामा

ओबामा की इन चेतावनियों के बीच ऐसी खबरें भी जोरों पर है कि राष्ट्रपति की नई योजना के तहत वॉलस्ट्रीट को सीधे फेडरल रिजर्व के नियंत्रण में लाने की योजना खटाई में पड़ सकती है या फिर उन्हें इस मुद्दे पर कुछ हद तक समझौता करना पड़ सकता है।

जानेमाने वित्तीय सलाहकार एलन लैंज के मुताबिक वॉल स्ट्रीट पहले ही कई कड़े नियमों में जकड़ा हुआ है उस पर और नियम लादने से उसका कारोबार प्रभावित हो सकता है।

हमने मंदी दूर कर दी है: बराक ओबामा

अमेरिकी वित्तीय तंत्र में सुधारों के लिए नए कानूनों की रूप रेखा तय कर रहे एक अधिकारी बार्ने फ्रैंक ने कहा कि वॉल स्ट्रीट में शिरकत करने वाली कम्पनियों पर फेड रिजर्व के नियंत्रण के सरकारी प्रस्ताव में संशोधन किए बगैर काम नहीं चलने वाला।

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10 फरवरी 2010
Sep 15, 2009
इशके पाश देश के लिए पेशा नही हे ओर पाकिस्तान को करोड़ो डोलेर देता हे तो वो क्या हे क्या पाकिस्तान उशे डबल करके देता हे सबक़ तो अमेरिका को नही ओबामा को लेना चाहिए  क्यो की वो जो पेशे पाकिस्तान को देता हे उशे पाकिस्तान अनु बॉमा बंटा हे ओर वो भी अमेरिका या भारत पे ही डाले गा ये सब बाँध करो ओर अपने देश को उतने पेशे खर्च करे तो अपने खुद का देस अछा ओर आर्थिक स्तिसे मजबूत रहे गा ओक तो ओबामा की आखे कब खुले गी के वो ये सब जान बूच के क्रा रहा हे क्यो वो भी तो उनेका ही तो हे तो ओबामा को ये सब बँध कर्दे
Raja hindustani indian Ahemdabad
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