07 नवंबर 2009
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली/हैदराबाद। आतंकवाद को समाप्त करने की दिशा में गंभीर व ठोस प्रयास न किए जाने को लेकर सरकार ने शुक्रवार को एक बार फिर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि पाकिस्तान में सभी आतंकी शिविर अभी भी बरकरार हैं और उनमें से कई सारे सैन्य ठिकानों के आसपास स्थित हैं।
मुंबई हमले के मामले में आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न किए जाने को लेकर पाकिस्तान से नाराज नई दिल्ली सरकार की ओर से कहा गया है कि पाकिस्तान में शांति और स्थिरता उसके लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इस्लामाबाद जब तक ठोस प्रयास नहीं करता उसके साथ संवाद बहाली संभव नहीं है।
रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने यहां एक कार्यक्रम के मौके पर संवाददाताओं से कहा,“पाकिस्तान से कई आतंकी संगठन संचालित हो रहे हैं। हमारे बार-बार आगाह करने के बावजूद वहां सभी आतंकी शिविर सक्रिय हैं। उनमें से कई तो सैन्य ठिकानों के आसपास स्थित हैं। यह हमारे लिए चिंता का विषय है।”
यह पूछे जाने पर कि यदि कोई और हमला हुआ तो भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी, एंटनी ने कहा,“जब तक पाकिस्तान गंभीर और ठोस प्रयास नहीं करता उसके साथ हमारे रिश्ते नहीं सुधर पाएंगे। हम पूरी तरह चौकस हैं और यदि कुछ घटता है तो हम उसी के अनुरूप जवाब देंगे।”
एंटनी ने कहा कि पाकिस्तान से लगातार सुरक्षा का खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा,“हम उसकी साजिशों को नाकाम करने के लिए तैयार हैं।”
इधर, नई दिल्ली में भारत यूरोपीय संघ (ईयू) शिखर सम्मेलन के मौके पर संवाददाताओं के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा,“लश्कर-ए-तैयबा की साजिश के बारे हमें पाकिस्तान से कोई सूचना नहीं मिली है।”
प्रधानमंत्री उस सवाल पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उनसे लश्कर-ए-तैयबा द्वारा भारत में हमले की उस साजिश के बारे में पूछा गया था, जिसमें अमेरिकी नागरिक डेविड कोलमैन हेडली और शिकागो निवासी पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा की कथित संलिप्तता की बात उजागर हुई है।
मनमोहन सिंह ने कहा,“हमने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हालात की समीक्षा की है और आतंकवाद से मुकाबले के लिए ठोस अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया है।”
प्रधानमंत्री ने कहा,“अगानिस्तान और पाकिस्तान में जो कुछ घटता है वह दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा हम पर असर डालता है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान की स्थिरता, प्रगति तथा वहां की शांति में हमारी महत्वपूर्ण भागीदारी है।