08 जनवरी 2007
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
बृज खंडेलवाल
आगरा। भारत और दूसरे देशों में ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जो एलोपैथी से मायूसी हाथ लगने के बाद अपने रोगों के इलाज के लिए होम्योपैथी चिकित्सा पद्घति को आजमा रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक एलोपैथी के लिए जो कई बीमारियां असाध्य बन जाती हैं, उनका होमियोपैथी में इलाज संभव है।
यहां एक होमियोपैथिक सम्मेलन में जमा हुए डॉक्टरों के मुताबिक होमियोपैथी में कई जटिल रोगों का निदान संभव है। उनका यह भी मानना है कि अगर कैंसर जैसी बीमारी का पता शुरुआती दौर में ही लग जाए तो इसका इलाज होमियोपैथी चिकित्सा पद्घति द्वारा किया जा सकता है।
ऐसे में जब कैंसर जैसी कई बीमारियों के मरीज एलोपैथी से मायूस हो रहे हैं, तो वे होमियोपैथी चिकित्सा पद्घति की शरण में जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जब कीमोथेरेपी आदि से गुजरने के बाद भी लोगों को कैंसर से मुक्ति नहीं मिलती तो वे होमियोपैथी की शरण में आते हैं। होमियोपैथी ने कई लोगों को जिंदगी दी है। यहां आयोजित चार-दिवसीय होमियोपैथिक सम्मेलन में पाकिस्तान समेत करीब दर्जन भर दूसरे देशों के होमियोपैथिक चिकित्सकों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया।
इसका आयोजन पारीक फाउंडेशन फॉर रिसर्च इन होमियोपैथी द्वारा किया गया। इस सम्मेलन में भाग लेने वाले डॉक्टरों ने होमियोपैथी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। जाने-माने होमियोपैथिक चिकित्सक राधेश्याम पारीक ने कहा, “यूं तो माना यह जाता है कि जर्मन डॉक्टर सैमुअल हैनीमैन ने होमियोपैथिक चिकित्सा पद्घति का आविष्कार किया, लेकिन होमियोपैथी के सिद्घांत भारत में हजारों वर्ष पहले स्थापित हो चुके थे।”
उन्होंने कहा कि होमियोपैथी में कई जटिल बीमारियों का इलाज संभव है। पाकिस्तानी मूल के एक स्विस होमियोपैथ डॉक्टर गुलाम सर्वर ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि होमियोपैथी की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। रूसी होमियोपैथ सरगेई लियोनोव ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि इस चिकित्सा पद्घति की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। इस क्षेत्र में डॉक्टरों और अस्पतालों की संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत है।