17 दिसम्बर 2007
आईबीएन-7
मंगल ग्रह पर सिलिका मिलने के बाद से ऐसा लगने लगा है वहां जीवन संभव है। यह ग्रह सदियों से धरती पर रहने वालों को लुभाता रहा है। पुराणों में भी इसके बारे में बहुत कुछ कहा गया है।
रोमन संस्कृति में मंगल युद्ध के देवता मार्स क्रेडिबस का प्रतीक था। मार्स क्रेडिबस एक जांबाज योद्धा था। रोमनवासियों ने अपने कैलेंडरों में साल के एक महीने का नाम इसी देवता के नाम पर मार्स रखा।
पढ़ें:- सबसे रहस्यमय ग्रह है मंगल पुराणों के मुताबिक मंगल देवताओं की सेना का सेनापति है। पदम पुराण के मुताबिक मंगल का जन्म भगवान शिव के पसीने की एक बूंद से हुआ था, जो पृथ्वी पर जा गिरी थी। जिसे ब्रह्मा के वरदान से नवग्रहों में जगह मिली।
भारतीय ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों में मंगल का स्थान बेहद अहम है। मंगल को पराक्रम और शुभ का प्रतीक माना गया है। उसे भौमाय यानी भूमि पुत्र भी बताया गया है।
पढ़ें:- मंगल ग्रह पर जीवन संभव...? पुराणों में कहा गया है कि धरती का बेटा बिल्कुल अपनी मां जैसा ही है। कमाल की बात यह है कि विज्ञान भी कुछ-कुछ ऐसा हीं सोचने लगा है।
‘नासा’ की मंगल अभियानों से मिली जानकारी से यह साबित हुआ है कि मंगल भी कभी पृथ्वी जैसी ही था। वहां भी नदियां और सागर थे। जो किसी वजह से बाद में भाप बनकर उड़ गए। वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी भी एक दिन वैसी ही बन सकती है।